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अराफात का मैदान जहाँ दुआएँ ठुकराई नहीं जातींलेखक: सैयद आसिफ इमाम काकवी ख़ास दुबई से

अराफात का मैदान जहाँ दुआएँ ठुकराई नहीं जातीं

लेखक: सैयद आसिफ इमाम काकवी ख़ास दुबई से

ज़िलहिज्जा की 9वीं तारीख़—हज का सबसे पाक और रूहानी दिन—जिसे “यौमे अराफा” कहा जाता है, इस्लाम के पाँच स्तंभों में से एक, हज का सबसे अहम हिस्सा है। यह वह दिन है जब लाखों हाजियों की आंखों से निकले आंसू मोती बन जाते हैं और दिलों की सच्ची तौबा अल्लाह की दरगाह में कबूल होती है। अराफात की वह ज़मीन, जहाँ हज़रत आदम (अलैहिस्सलाम) और हज़रत हव्वा (अलैहा सलाम) की मुलाकात हुई थी, आज फिर से इंसानियत, तौबा और अल्लाह की रहमतों का गवाह बनती है। इस साल बिहार से 2378 हाजी इस मुबारक सफर पर रवाना हुए, जिनमें सबसे ज़्यादा 282 यात्री पटना से हैं। हाजियों की मदद के लिए 16 हज इंस्पेक्टर भी रवाना किए गए हैं। पर अफसोस इस बात का है कि गया एयरपोर्ट से हज पर जाना सबसे महंगा साबित हो रहा है। लगभग ₹4,18,500 का कुल खर्च, जिसमें अकेले फ्लाइट किराया ₹1,64,934 और एयरपोर्ट टैक्स ₹8,179 है। इसके अलावा क़ुर्बानी के ₹16,600 का खर्च अलग। जब दिल्ली, कोलकाता और मुंबई जैसे शहरों से कम खर्च में हज यात्रा मुमकिन है, तो बिहार के हाजी सिर्फ गया से ही क्यों जाएँ? ये सवाल न सिर्फ प्रशासन से, बल्कि हमारी धार्मिक संस्थाओं और नेताओं से भी किया जाना चाहिए। क्या एक गरीब राज्य के मुसलमानों को महंगे हज पैकेज के ज़रिए मजबूर किया जा रहा है ? आज जब लाखों हाजी अराफात की तपती ज़मीन पर अल्लाह के आगे सर झुकाए हैं, उनके लबों पर सिर्फ एक ही दुआ है “या रब्ब! हमें माफ़ कर दे, हमारी दुआओं को क़ुबूल कर, हमें अपनी रहमतों से नवाज़ दे। हज़रत मुहम्मद (स.अ.) ने फरमाया था अराफात का दिन, दुआओं की क़ुबूलियत का दिन है। अल्लाह अपने बंदों से सबसे ज़्यादा क़रीब इसी दिन होता है। हज सिर्फ एक सफर नहीं, बल्कि रूहानी तज़कीया  है। अराफात का यह दिन हमें याद दिलाता है कि हमें अपनी आत्मा को झुकाना है, अपने अहम, घमंड, नफ़रत और खुदगर्जी की कुर्बानी देनी है। आइए हम सब इस मुबारक दिन पर यह संकल्प लें कि हम नाइंसाफ़ी के खिलाफ आवाज़ उठाएँगे।
गरीब हाजियों के लिए सस्ते और सुलभ हज की मांग करेंगे। अराफात से उठी दुआओं में न सिर्फ अपने लिए, बल्कि पूरे समाज की भलाई के लिए भी दुआ करेंगे। “या अल्लाह! जो वहाँ हैं, उनकी दुआएँ क़ुबूल कर; और जो यहाँ हैं, उनके दिलों की सच्चाई को भी अपनी रहमत से नवाज़। हज पर गए सभी हाजियों को हज मबूर, हज मक़बूल की दिली मुबारकबाद। और अराफात की इस पाक सरज़मीन से हम सबके लिए अमन, इंसाफ़ और रहमत की दुआ।

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