पति की लंबी उम्र की कामना के लिए महिलाएं करती है बट सावित्री पूजा


पूजा का मुहूर्त सुबह 11:25 से शाम 4:25 बजे तक
आज सुहागीन महिलाएं करेगी बट सावित्री पूजा का अनुश्ठान
रिपोर्ट, संजय सोनार
कुर्था (अरवल) वट सावित्री व्रत 26 मई सोमवार को मनाया जाएगा। यह व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। महिलाएं इस दिन व्रत रखकर वट वृक्ष की पूजा करती हैं। वे अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं। यह पर्व ज्येष्ठ मास की अमावस्या को मनाया जाता है। मिथिला पंचांग के अनुसार पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11:02 से दोपहर 1:00 बजे तक रहेगा। बनारसी पंचांग के अनुसार यह मुहूर्त सुबह 11:25 से शाम 4:25 बजे तक है। विवाहित महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना से यह व्रत विधिपूर्वक करती हैं। सनातन धर्म में वट वृक्ष को जीवन का प्रतीक माना गया है। पौराणिक कथा के अनुसार
सावित्री ने अपने पति सत्यवान को यमराज से वापस पाया था। महिलाएं वट वृक्ष के चारों ओर कलावा बांधती हैं और पति की दीर्घायु की प्रार्थना करती हैं। वैवाहिक जीवन की समस्याओं से
मुक्ति के लिए इस दिन पति के साथ वट वृक्ष की 21 बार परिक्रमा करने की मान्यता है। वृक्ष के नीचे घी का दीपक जलाकर पूजा पूजा की जाती है। ऐसा करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति आती है।
*क्या कहते है पुरोहित*
प्राचीन प्राचीन सूर्यमंदिर सूर्यमंदिर कुर्था के पुजारी सतीश पांडेय ने बताया कि पूजा के लिए एक बांस की टोकरी में पूजन सामग्री रखें। इसमें बस का पंखा और भगवान शिव की तस्वीर अवश्य होनी चाहिए। वट वृक्ष के पास जाकर पंचोपचार विधि से पूजा करें। गंगाजल, कच्चा दूध, चावल और नवेद्य अर्पित करें। साथ ही रोली, चंदन, अक्षत, पान, सुपारी, फूल, फल और चना भी चढ़ाएं। इसके बाद वट वृक्ष की 21 या 11 बार रोली लपेटकर परिक्रमा करें। पूजा के बाद वट सावित्री की कथा सुनना जरूरी है। इस दिन दान का भी विशेष महत्व है। श्रृंगार की वस्तुएं और चना अवश्य दान करें। नई नवेली दुल्हनें लाल वस्त्र पहनकर ही पूजा करें। ऐसा करने से अखंड सौभाग्यवती का आशीर्वाद प्राप्त होता है।