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हो गये तथागत कैसे तुम


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डा उषाकिरण श्रीवास्तव
लुम्बिनी वन में जन्म लिए तुम
बचपन राज़ महल में बिताया,
जन-जन के कल्याण के लिए
त्याग-तपस्या को अपनाया ।
उस रात हुआ था क्या मन में
चुपचाप चले निर्जन वन में,
सुख-सुविधा त्यागा क्षण-भर में
हो गये तथागत गौतम से तुम।
रोती-बिलखती रही यशोधरा
सोता रहा नन्हा-सा बालक,
मोह-जाल को तोड़ के तुम
शांति की खोज में निकल पड़े।
अनगिनत पीड़ा को सहकर
सहज न था जंगल में रहकर,
राज-धर्म के कुलदीप तुम को
शत्-शत् नमन् वंदन है तुमको।
साहित्यकार, समाज सेवी,
मूजफ्फरपुर, बिहार
