बिहार राज्यआशा कार्यकर्ता संघ (गोप गुट)की जिला कमेटी की बैठक संपन्न|


*20 मई से 24 मई 2025 तक हड़ताल को सफल करने का फैसला*
जहानाबाद
स्थानीय एक्टू कार्यालय कार्यालय जहानाबाद में बिहार राज्यआशा कार्यकर्ता संघ (गोप गुट) जिला शाखा जहानाबाद के जिला कमेटी की बैठक कुमारी सुषमा सिंह जिला अध्यक्ष के अध्यक्षता में बैठक संपन्न हुई| बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार राज्य आशा कार्यकर्ता संघ की 27 अप्रैल 2025 को संपन्न राज्य स्तरीय बैठक में लिए गए निर्णय के आलोक में बिहार की सभी आशा कार्यकर्ता आशा फैसिलिटेटर 20 से 24 मई2025 को 5 दिवसीय हड़ताल पर रहेगी |जिला सचिव सुनीता भारती ने कहा कि 2023 में 32 दिवसीय हड़ताल के क्रम में आशा कार्यकर्ता फैसिलिटेटर के मासिक मानदेय राशि ₹1000 को बढ़ाकर ₹2500 करने का लिया गया था जिसे करीब 2 साल बीतने पर भी लागू नहीं किया गया है| जिससे आशा कार्यकर्ताओं में काफी नाराजगी है तथा सरकार को चुनाव में सबक सिखाने का फैसला लिया ।
अपनी मांगों के समर्थन में कहा कि 2023 में हुए समझौते के अनुरूप आशा और आशा फैसिलिटेटर के मानसिक मंनदेय 1000 से बढ़कर ₹2500 से बढ़कर ₹10000 करने संबंधी आदेश अभिलंब निर्गत किया जाए | पिछले 6 माह से लंबित मानदेय का भुगतान अभिलंब निर्गत किया जाए और इसके लिए दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए | पिछला सारा बकाया का भुगतान करते हुए पोर्टल व्यवस्था में सुधार किया जाए | रिटायरमेंट की उम्र की सीमा 65 वर्ष की जाए सेवानिवृत्ति के समय 10 लाख का रिटायरमेंट पैकेज दिया जाए तथा अनिवार्य मासिक पेंशन की सुविधा दी जाए |आशाओं को विभिन्न तरह के कामों के लिए जो प्रोत्साहन राशि मिलती है उसका पुनरीक्षण किया जाए |विदित हो कि पिछले 10 वर्षों में इसमें कोई वृद्धि नहीं हुई है केंद्र सरकार और राज्य सरकार सम्मिलित विमर्श के आधार पर आशा और आशा फैसिलिटेटर के लेकर 21000 रुपए बेसिक न्यूनतम मानसिक मानदेय निर्धारित किया जाए | हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर से जुड़ी आशाओं को देय राशि का भुगतान पोर्टल के माध्यम से किया जाए और इसमें आशा फैसिलिटेटर को भी जोड़ा जाए| पर्यवेक्षक बतौर भाकपा माले के जिला सचिव कां रामाधार सिंहने कहा की आशा कर्मी शायद एकमात्र ऐसी वर्कर हैं जिनका न तो श्रमिक माना जाता है न उनके लिए कोई पारिश्रमिक तय है| उनको दी जाने वाली धनराशि का नाम भी पारितोषिक रखा गया है |उनके मानदेय या मजदूरी नहीं मिलती जबकि आज जब श्रमिक वर्ग पर भारत सरकार के चौतरफा हमले जारी हैं |महासंघ के प्रधान सलाहकार राम उदय कुमार ने कहा कि भारतीय संविधान ने महिलाओं को बराबरी का हक दिया और आगे बढ़ने का अवसर प्रदान किया है| राष्ट्र निर्माण में महिलाओं खास कर कामकाजी महिलाओं का अहम योगदान है |इसमें आज भारत में जहां एक तरफ महिलाओं श्रमिकों की संख्या में वृद्धि हुई है वहीं दूसरी तरफ यह सरकार महिला श्रम और उनकी दक्षता को बेहद सस्ते श्रम के रूप में उपयोग कर रही है| बैठक को संबोधित करने वालों में बिणा कुमारी, रेशमा कुमारी, चंचल कुमारी ,मीना देवी ,पिंकी कुमारी, श्याम सुंदरी देवी, नीलम कुमारी, गीता कुमारी, अनु देवी सहित काफी संख्या में आशा फैसिलिटेटर उपस्थित थे।