संगीत के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाना चाहते हैं दृष्टिहीन पप्पू कुमार

मुजफ्फरपुर, 12 अप्रैल,जब मन में हौसला और दृढ़ संकल्प हो, तो कोई भी व्यक्ति, चाहे वह नेत्रहीन हो या नहीं, कुछ भी हासिल कर सकता है।बंदरा प्रखंड के सुंदरपुर रतवारा पंचायत निवासी पप्पू कुमार जन्मजात दृष्टिहीन हैं। संगीतकार-गायक और गीतकार के रूप में पप्पू कुमार इन दिनों सोशल मीडिया पर सुखिर्यो में हैं। 32 वर्षीय पप्पू के पिता नवल किशोर सिंह खेती किया करते थे और उनका निधन बहुत पहले हो गया। इनकी मां सीता देवी गृहणी है और छोटा भाई
बाहर कारखाना में काम करता है।
बचपन के दिनों से हीं पप्पू कुमार का रूझान संगीत की ओर था। रेडियो पर वह मोहम्मद रफी, लता मंगेश्कर के गाये गीतों को सुना करते थे।वर्ष 2015 में पप्पू ने संगीत के क्षेत्र में अपनी यात्रा शुरूआत की। उन्होंने गीत की रचना की और उसे संगीबद्ध कर गाया। पप्पू कुमार ने अबतक 15 गीतों की रचना की है और उसे संगीतबद्ध और गाया है। पप्पू कुमार ने शिक्षा नहीं ली है। पप्पू कुमार को किसी तरह की सरकारी सुविधा नहीं मिली है। पप्पू कुमार को दिव्यांगता पेंशन के रूप में केवल 400 रुपये मिलते हैं। पप्पू ने मदद की आस में राज्य प्रशासन से लेकर राष्ट्रपति को पत्र लिखा, लेकिन आज तक कोई जवाब नहीं मिला है। पप्पू चाहते हैं कि कला-संस्कृति जगत, फिल्म इंडस्ट्री और कलाकार उनके गीतों को देखें और उन्हें काम करने का अवसर दें। पप्पू को उम्मीद है कि एक दिन वह अपने गीतों के माध्यम से बड़ा नाम कमाएंगे।

