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ब्याह जो दिया बाबा आपने ऊंचा घराना देख कर एक बार उस घर के आंगन भी देख आते तो क्या बिगड़ जाता आपका….!


ब्याह जो दिया बाबा आपने ऊंचा घराना देख कर
एक बार उस घर के आंगन भी देख आते तो क्या बिगड़ जाता आपका….!
ऊंची कद काठी तनिक रंग सांवला तख्ते नोटों से भरी
दो चार बातें बतिया संस्कार भी समझ लेते तो क्या बिगड़ जाता आपका…..!
शहजादी बन फिरती थी पूरे घर आंगन में तेरे
आंखों में छुपे दर्द, थोड़ी मेरी व्यथा समझ लेते तो क्या बिगड़ जाता आपका……!
उम्र उन्नीस कि और जिम्मेदारियां थमा दी छप्पन कि
बेटी हो कम बोला करो,जो बोलने दिए होते तो क्या बिगड़ जाता आपका…..!
आज लाश जली बेटी की मिली है क्यों रोते हो दहाड़े मारकर
दो घर की लाज बचाने को पराया किया,अपने घर का दरवाजा खुला रखते तो क्या बिगड़ जाता आपका…!
ममता प्रिया
रक्तसेविका सह सामाजिक कार्यकर्ता सह लेखिका, जहानाबाद, बिहार