अशोक प्रियदर्शी ने हम पार्टी से दिया इस्तीफा अभी कुछ ही दिन पहले शामिल हुए थे हम पार्टी में

आज देश में चारों तरफ अराजकता का माहौल है। धर्म के नाम पर जनसाधारण के भावनाओं से खिलवाड़ किया जा रहा है। देशहित के नाम पर संवैधानिक शक्तियों का दुरपयोग किया जा रहा है।अभी हाल ही में कांग्रेस से हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा में शामिल हुए दलित नेता अशोक कुमार “प्रियदर्शी” ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि जिस तरह केन्द्र सरकार अपनी तानाशाही रवैया अपनाते हुए संवैधानिक शक्तियों का दुरपयोग कर रही है यह कतई बर्दाश्त करने योग्य बात नही है। श्री प्रियदर्शी ने प्रेस के हवाले से बताया कि भाजपा की सरकार धर्म के आड़ में सभी भारतवासियों के भावनाओं से खिलवाड़ कर रही है चाहे वो हिन्दू हो मुस्लिम हो सिक्ख, ईसाई, बौद्ध, जैन या अन्य जो भी धर्मावलंबियों के लोग हैं। संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 में सभी को धार्मिक स्वतंत्रता है और कोई भी धर्म हमें आपस में भेदभाव या नफ़रत नही सिखाता है। आज वक्फ बोर्ड के नियमों के खिलाफ भारी फेरबदल कर इनके जमीन को हड़प कर अडानी अंबानी के हाथों में बेचने की तैयारी शुरू हो गई है । जबकि इस्लामिक परंपरा के अनुसार वक्फ मुसलमानों द्वारा समुदाय के लाभ के लिए दिया दिया गया धार्मिक दान है जिसका उपयोग मस्जिदों, मदरसों, कब्रिस्तानों, अनाथालयों या जरुरतमंदों के सहयोग के लिए किया जाता है। हां, इसमें कुछ त्रुटियां रही है जिससे धर्म के ठिकेदार गलत करते थे उसमें परिवर्तन की जरूरत होती है। लेकिन इसका मतलब ये नही है के आप ग़लत मनसा से पुरा का पुरा सिस्टम बदलकर वक्फ के जमीन किसी दूसरे को हवाले करें। कार्पोरेट घरानों की मंशा पहले प्राकृतिक संपदा, फिर राष्ट्रीय संपत्ति अब अल्पसंख्यकों के मस्जिदों, बौद्धमठों और गुरुद्वारों पर बुरी नजर और आने वाले दिनों में एससी-एसटी/ओबीसी/अल्पसंख्यक और साधारण हिन्दुओं को भी गुलाम बनाने की साज़िश है। और केन्द्र सरकार में बैठे हमारे ही समुदाय के स्वार्थी लोगों से देश और संविधान पर सबसे ज्यादा खतरा मंडरा रहा है। इसलिए मैं अशोक कुमार “प्रियदर्शी” हम पार्टी से इस्तीफा देता हूं।।।।

