पलायन रोको, नौकरी दो यात्रा का चौथा दिन: बिहार के युवाओं ने की आवाज़ बुलन्द



चौथा दिन: मोतिहारी में युवाओं का उमड़ा जनसैलाब
मोतिहारी, 19 मार्च 2025 (बुधवार):
मोतीहारी. बिहार में बढ़ती बेरोजगारी और युवाओं के पलायन के खिलाफ कांग्रेस की पलायन रोको नौकरी दो यात्रा अपने चौथे दिन और अधिक प्रभावशाली हो गई। यात्रा के इस चरण में एनएसयूआई प्रभारी श्री कन्हैया कुमार के नेतृत्व में हजारों युवा सड़कों पर उतरे और सरकार की विफलताओं के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद की।
बिहार के युवाओं के हक और रोजगार की मांग को लेकर कांग्रेस द्वारा निकाली जा रही “पलायन रोको, नौकरी दो यात्रा” अपने चौथे दिन मोतिहारी पहुंची। इस यात्रा में हजारों युवाओं की भागीदारी ने इसे एक जनआंदोलन का रूप दे दिया है।
यात्रा की शुरुआत सुबह झंडा तोलन के साथ हुई, जहां युवाओं ने देश और अपने अधिकारों के प्रति निष्ठा और प्रतिबद्धता की शपथ ली। इसके बाद गांधी चौक से यात्रा का विधिवत शुभारंभ हुआ।यात्रा खैरवा ईदगाह के पास टी-प्वाइंट पहुंची, जहां युवाओं ने अपनी व्यथा साझा की। कई छात्रों ने बताया कि बिहार में सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया ठप पड़ी है, पेपर लीक के कारण परीक्षाएं बार-बार रद्द हो रही हैं और नौकरी मिलने की कोई उम्मीद नहीं दिखती। यात्रा फिर से आगे बढ़ी और कुशमहवा में नुक्कड़ सभा आयोजित की गई। यहां कन्हैया कुमार ने छात्रों, बेरोजगार युवाओं और स्थानीय लोगों को संबोधित करते हुए कहा—
“बिहार के युवा अपने ही राज्य में नौकरी पाने का अधिकार रखते हैं। सरकार अगर रोजगार नहीं दे सकती, तो उसे सत्ता में बने रहने का भी हक नहीं!” दोपहर बाद प्रेस वार्ता आयोजित हुई। पत्रकारों से बातचीत में कन्हैया कुमार ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि— “डबल इंजन सरकार सिर्फ़ जुमलों की सरकार है। अगर बिहार में सच में विकास हुआ होता, तो लाखों युवा रोज़गार की तलाश में पंजाब, हरियाणा और दिल्ली की तरफ़ न भाग रहे होते। यात्रा पुनः चन्दन बारा से आरंभ हुई और पूरे रास्ते पर युवाओं की भीड़ बढ़ती गई। शाम में यात्रा का समापन छोटी फुलवरिया में हुआ, जहां एक बार फिर युवाओं ने संकल्प लिया कि यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक बिहार के नौजवानों को उनके हक का रोजगार नहीं मिल जाता। रात्रि विश्राम के लिए यात्रा दल हजारी मील ग्राउंड, बैरगनिया पहुंचा, जहां अगले दिन की रणनीति तय की गई।
यात्रा के दौरान युवाओं ने साझा किया दर्द
पदयात्रा के दौरान बिहार के युवाओं ने श्री कन्हैया कुमार के समक्ष अपनी समस्याएँ रखीं। प्रतियोगी परीक्षाओं के बार-बार पेपर लीक होने, भर्तियों के अटकने और सरकारी नौकरियों की कमी से परेशान युवाओं ने बताया कि वे मजबूरी में अन्य राज्यों की ओर रुख कर रहे हैं। यात्रा में शामिल एक छात्र ने रोते हुए कहा, “हमने सालों मेहनत की, लेकिन हर बार सरकार की लापरवाही ने हमारे सपनों को तोड़ दिया। अब इंतजार नहीं, हमें हक चाहिए!”
स्कूली बच्चों ने भी दिया समर्थन
यात्रा में न केवल युवा, बल्कि स्कूली बच्चे भी शामिल हुए। वे हाथों में तख्तियां लिए यह संदेश दे रहे थे कि यह सिर्फ़ वर्तमान पीढ़ी की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की लड़ाई है। ध्वजारोहण के साथ इस आंदोलन को और अधिक संकल्पबद्ध किया गया, और पूरे जोश के साथ यह यात्रा आगे बढ़ी।
सरकार पर हमला: “विकास नहीं, सिर्फ झूठे वादे”
कांग्रेस नेता श कन्हैया कुमार ने इस मौके पर कहा, “बिहार की BJP-JDU सरकार लगातार युवाओं के सपनों को तोड़ रही है। रोजगार नहीं, भर्ती नहीं, बस वादे और जुमले दिए जा रहे हैं। लेकिन अब बिहार का युवा चुप नहीं बैठेगा।”
उन्होंने बिहार सरकार और केंद्र की डबल इंजन सरकार को घेरते हुए कहा कि जब से यह सरकार सत्ता में आई है, घोटालों और पेपर लीक का सिलसिला नहीं थम रहा। “डबल इंजन सरकार का मॉडल सिर्फ़ घोटाले और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करना बन चुका है,” उन्होंने कहा।
महिलाओं को नहीं मिल रहा राशन, भूख और बेबसी की मार
यात्रा के दौरान कन्हैया कुमार ने स्थानीय जनता से बातचीत की। एक महिला ने बताया कि अब उसे राशन मिलना बंद हो गया है। यह सुनकर यात्रा में मौजूद लोगों ने सरकार के खिलाफ नाराजगी जाहिर की और पूछा कि आखिर बिहार की जनता को बुनियादी सुविधाओं से क्यों वंचित किया जा रहा है?
युवाओं के हक की लड़ाई जारी रहेगी
चौथे दिन विशाल पदयात्रा ने यह साबित कर दिया कि बिहार के युवा अब झूठे वादों और खोखली नीतियों को बर्दाश्त नहीं करेंगे। इस यात्रा ने पूरे राज्य में एक नई जागरूकता पैदा कर दी है और सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। श्री कन्हैया कुमार ने साफ कहा, “यह सिर्फ़ एक यात्रा नहीं, यह युवाओं के भविष्य की लड़ाई है। जब तक बिहार के युवाओं को रोजगार नहीं मिलेगा, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा।” अब बिहार का युवा अपने भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होने देगा। यह आंदोलन अब सिर्फ एक मांग नहीं, बल्कि बिहार में बदलाव की लहर बन चुका है।