भारत अपनी ज्ञान परंपरा के बल पर ही विश्व गुरु बनने के प्रधानमंत्री की सपना को करेगा साकार : प्रोफेसर के.एन. सिंह


*सीयूएसबी के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने मिथिला विश्वविद्यालय के इतिहासकारों को किया* *सम्मानित*
माननीय कुलपति प्रोफेसर कामेश्वर नाथ सिंह के संरक्षण तथा अध्यक्षता में 13 मार्च 2025 को दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय,गया, बिहार में भारतीय ज्ञान प्रणाली (आईकेएस) पर छह दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम का समापन हुआ, जिसमें संकाय सदस्यों और युवा शोधकर्ताओं को आईकेएस को पाठ्यक्रम में शामिल करने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया था l यह कार्यक्रम यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (एमएमटीटीसी) सीयूएसबी द्वारा आयोजित किया गया था l फेस टू फेस मोड ऑफ़ लर्निंग के तहत कुल 36 सत्र संचालित किए गए l विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के आईकेएस प्रभाग और दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) ने एसएलजी के सहयोग से भारती ज्ञान प्रणाली पर छह दिवसीय कैपेसिटी बिल्डिंग कार्यक्रम का उद्देश्य संकाय सदस्यों को भारत की समृद्ध बौद्धिक परंपराओं और समकालीन शिक्षा में उनकी प्रासंगिकता के बारे में गहन जानकारी प्रदान करना था। छह दिवसीय कैपेसिटी बिल्डिंग कार्यक्रम में भारतीय ज्ञान प्रणाली के सैद्धांतिक दृष्टिकोण पर चर्चा की गयी और संस्कृत और अन्य प्राचीन भारतीय ज्ञान प्रणाली के महत्व को बताया गया। वेदों, पंचतंत्र, पुराणों,आयुर्वेद और महाकाव्यों के उदाहरण देते हुए बताया गया कि ये आधुनिक शिक्षा के लिए उपयोगी हैं। भारतीय ज्ञान प्रणाली के अंतःविषय (इंटरडिसिप्लिनरी) को शामिल किया गया और आधुनिक प्रबंधन और प्रौद्योगिकी पाठ्यक्रम का उपयोग करके इसे और व्यापक रूप से अभ्यास की आवश्यकता पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में विभिन्न विद्वानों के बीच सहयोग स्थापित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया, ताकि भारतीय आस्था को गहराई से समझा जा सके। प्राचीन भारतीय बहुसांस्कृतिक शोध परंपरा और अंतरविषयक अध्ययन की समृद्ध विरासत पर भी प्रकाश डाला गया। भारतीय ज्ञान प्रणाली के सिद्धांतों को आधुनिक पाठ्यक्रम विकास में शामिल करने के महत्व पर जोर दिया गया । बताया गया कि एमआईटीटीसी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। भारतीय ज्ञान प्रणाली की सांस्कृतिक परंपराओं पर प्रकाश डालते हुए कहा गया कि भारतीय ज्ञान प्रणाली केवल परंपरा के रूप में नहीं, बल्कि एक जीवन शैली के रूप में देखी जानी चाहिए, जो हमारे विचार और कार्य को प्रभावित करती है। डॉ. अशोक कुमार, निदेशक, आईकेएस-सीबीपी: यूजीसी और डीन, एसएलजी तथा एसएलजी विभाग के डॉ. सुरेन्द्र कुमार जो इस कार्यक्रम के समन्वयक थे, ने सत्र का संचालन करते हुए कार्यक्रम को पूर्णता प्रदान किया।
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के इतिहास विभाग की तरफ से चार प्रतिभागी कार्यक्रम में शामिल हुए इनमें डॉ. मनीष कुमार सिंह, डॉ. अमिताभ कुमार (विश्वविद्यालय इतिहास विभाग), डॉ. राजकिशोर, (इतिहास विभाग, आर.बी. कॉलेज, दलसिंहसराय) और डॉ. कुमारी ज्योति (इतिहास विभाग, आर.के. कॉलेज, मधुबनी) शामिल हैं l
सभी प्रतिभागी ने समय पर अपने प्रदत कार्यों को पूर्ण कर कार्यक्रम के सफल संचालन में सहयोग दिया l