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प्रो. डॉ. चंद्रिका प्रसाद यादव के श्राद्ध कार्यक्रम 2 मार्च 2025 में लालू यादव सहित कई दिग्गज होंगे शामिल, श्राद्ध कार्यक्रम को लेकर व्यापक तैयारी अंतिम चरण में




*”राजनीति, शिक्षा और समाजसेवा में अमिट छाप छोड़ गए प्रो. डॉ. चंद्रिका प्रसाद यादव”*

*”इंदिरा गांधी से लेकर लालू-नीतीश तक थे करीबी,  बिहार की राजनीति में  रखते थे अहम स्थान*




जहानाबाद
        बिहार के प्रख्यात शिक्षाविद्, समाजसेवी और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता प्रो. डॉ. चंद्रिका प्रसाद यादव के श्राद्ध कार्यक्रम का आयोजन उनके पैतृक गांव मीरा बिगहा, जहानाबाद में किया जाएगा। । इस अवसर पर राष्ट्रीय जनता दल सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव सहित बिहार के कई  दिग्गज नेता, समाजसेवी, शिक्षाविद् और गणमान्य व्यक्ति शामिल होंगे।  समाजसेवी और कांग्रेसी नेता प्रो. डॉ. चंद्रिका प्रसाद यादव के आकस्मिक निधन से शिक्षा और राजनीति जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। जहानाबाद के शिक्षा जगत में उन्होंने जो क्रांति लाई, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। नई पीढ़ी के लोग भले ही उनके योगदान से अनभिज्ञ हों, लेकिन 1977 से 2005 तक बिहार की राजनीति में उनका प्रभाव निर्विवाद रूप से उल्लेखनीय था। भले ही प्रो. यादव कभी विधायक, सांसद या मंत्री नहीं बने, लेकिन उनकी राजनीतिक हैसियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनके साथ जुड़े कई लोग भारत सरकार में कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री, बिहार सरकार के मंत्री, विधायक और सांसद बने। उनकी दी गई *”बांसुरी और कलम”* की लोकोक्ति आज भी चर्चित है।

*इंदिरा गांधी भी कर चुकी थीं चुनाव प्रचार*

1977 में जब जहानाबाद लोकसभा सीट से वे कांग्रेस उम्मीदवार बने, तो स्वयं इंदिरा गांधी उनके प्रचार के लिए जहानाबाद आई थीं। वे अपने समय के कद्दावर कांग्रेसी नेता माने जाते थे और उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा, बिंदेश्वरी दुबे और ‘शेर-ए-बिहार’ रामलखन सिंह यादव जैसे दिग्गज नेताओं का सानिध्य प्राप्त था। 1990 के बाद जब लालू प्रसाद यादव का राजनीतिक उत्थान हुआ, तो *डॉ. चंद्रिका प्रसाद यादव को उनके ‘नवरत्नों’ में गिना जाता था।* कहा जाता है कि शुरुआती दौर में लालू यादव और नीतीश कुमार के बीच जब भी राजनीतिक मतभेद होते, तो कई बार प्रो. यादव ने ही मध्यस्थता कराई थी। उनकी पहचान राजनीति, प्रशासन, न्यायपालिका और शिक्षा जगत के शीर्ष लोगों के बीच भी थी। डॉ. यादव की सबसे बड़ी विशेषता थी कि वे बौद्धिक समाज को अपना बना लेने की अद्भुत क्षमता रखते थे। वे अपने पीछे शैक्षणिक संस्थानों की एक लंबी श्रृंखला छोड़ गए हैं, जो उनकी शिक्षा क्षेत्र में की गई अभूतपूर्व सेवा को दर्शाती है। उनकी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अब उनके पुत्रों पर है। उनके ज्येष्ठ पुत्र डॉ. संजय कुमार वर्तमान में कांग्रेस सेवा दल के प्रदेश संयोजक हैं, जबकि डॉ. अजय कुमार केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के खास सहयोगी हैं। उनके तीसरे पुत्र चंद्र प्रकाश उर्फ बंटी, लालू यादव के पुत्र तेज प्रताप यादव के मित्र हैं। अब यह उनकी जिम्मेदारी होगी कि वे अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाएं। प्रो. डॉ. चंद्रिका प्रसाद यादव के निधन से शिक्षा और राजनीति जगत को अपूरणीय क्षति हुई है। उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।

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