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*डॉ एकता की कलम से—-*


*तुम्हारे जैसे अनुराग  हम ना दिखाएंगे।*
*यूं हमने जो दिखाई फिर कृतिवान  हो जाओगे  ।*
*तुम अगर जो तरसे फिर तरसो हमारे स्नेहा को*
*अब हम ना तरसेंगे हम जो तरसे फिर विख्यात हो जाओगे।*


*तुम अपने प्रेम का चर्चा  सरेआम करो ।*
*अब हम ना करेंगे हमने जो किया मशहूर हो जाओगे।*
*यूं हमारे कदमों में गिरने को मजबूर हो जाओगे।*
*हमारे चर्चे जो सरेआम करोगे फिर यूं ही खुद को बदनाम करोगे।*

*ना हम चर्च आम करेंगे ना तुझको बदनाम करेंगे*
*तुम हमे देखो ,हम ना तुम्हें देखेंगे, हमने जो देखा फिर मगरूर हो जाओगे।*
*इस जमाने में मशहूर हो जाओगे, यह जीवन बस एक यात्रा है।*


*जिसकी आखरी मंजिल मणिकर्णिका घाट है, फिर बाकी सब ख़ाक है।*
*हम सब को बस एक किरदार निभाना है।*
*हमारा डायरेक्टर बैठा जग को रचने वाला है।*
*जन्म से शुरू हुई यात्रा अंतिम चिता के बाद पड़ा रह जाता है।*

*हुस्न ,शबाब ,अभिमान ,नफरतें ,धर्म समाज, दौलत ,शोहरत, ईर्ष्या छल , तरक्की ,लड़ाई ,झगड़ा जीवन में प्यार है।*

*फिर हर पल खास है वरना बाकी सब बकवास है।*
*क्योंकि जीवन की सच्चाई बस एक राख है।*

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