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रमेश ‘कँवल’,बिहार प्रशासनिक सेवा के सेवा निवृत पदाधिकारी रविवरीय अंक के लिए संकलित


अनुराग मिश्र ‘ग़ैर’ मुरादाबाद की ग़ज़ल
दुआओं का असर है
ख़ुदा की तो नज़र है,
बशर तू बेख़बर है |
तलब मय की लगी है,
मिरा साक़ी किधर है |
सफीना बच के लौटी,
दुआओं का असर है |
है चिड़ियों की अमानत,
शजर पर जो समर है |
निहाँ हो लो ग़ज़ल में,
बहुत उम्दा बहर है |
संभालो ग़ैर मुझको,
बड़ी मुश्किल डगर है | अनुराग मिश्र ग़ैर