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रमेश ‘कँवल’,बिहार प्रशासनिक सेवा के सेवा निवृत पदाधिकारी रविवरीय अंक के लिए संकलित


दीप राजपूत ‘माहिर’,रामपुर (उ0 प्र0 की) ग़ज़ल
इक दिन तो परिचय होगा
जब अनुकूल समय होगा
अपना भाग्य उदय होगा
मन में जब निश्चय होगा
दुर्गम रस्ता तय होगा
सब कुछ तुझ पर छोड़ चुके
क्या हमको संशय होगा
मीठे – मीठे वचनों में
गुप्त कोई आशय होगा
आज भले अंजान हैं हम
इक दिन तो परिचय होगा
होगा पूर्ण तभी जीवन
जब सुख-शोक विलय होगा
मधुर मिलन का अंत वियोग
मन कैसे निर्भय होगा
-प्रदीप राजपूत ‘माहिर’
रामपुर (उ0 प्र0)