रॉयल गार्डन, पी एन टी कॉलोनी, पटना में दिव्य ज्योति

जाग्रति संस्थान के तत्वाधान में स्वर्गीय डॉ प्रकाश कुमार जी के तीसरी पुण्य तिथि के अवसर पर उनकी आत्मा की शांति के लिए एक दिवसीय सतसंग प्रवचन एवम् भजन संकीर्तन का भव्य आयोजन किया गया। संस्थान के संस्थापक व संचालक सर्व श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्या साध्वी सुश्री सोनिया भारती जी समझाई कि मानव तन की महानता हर शास्त्र ग्रंथों में गायी गई हैं रामचरित मानस में तुलसी दास जी कहते हैं श्बड़े भाग्य मानुष तन पाया सुर दुर्लभ सब ग्रन्थ ही गावार अर्थात मानव तन बड़े भाग्य से मिलता है और यह देवताओं को भी दुर्लभ हैं । ऐसे महान तन को प्राप्त कर हर मानव का एक लक्ष्य है कि इस तन के रहते रहते ईश्वर को प्राप्त कर लेना हैं भागवत में कथा बताती है कि राजा परिक्षित को जब श्राप मिलता है कि सांतवें दिन तक्षक सर्प के डसने से मृत्यु हो जाएगी। कथा कहती है कि राजा परीक्षित को जब सुखदेव मुनि जी ने कथा सुनाई और वे मुनि जी से गुरु ज्ञान प्राप्त करके ईश्वर का साक्षात्कार कर अपने जीवन को सार्थक कर पाएं। साध्वी सोनिया भारती जी ने आगे कहा की जब तक मानव अपने वास्तविक स्वरुप को नहीं पहचान लेता तब तक उसके जीवन मे शांति सकून नहीं आ सकती हम सब लोग भौतिक संसाधनों के द्वारा सुख को प्राप्त करना चाहते है परन्तु प्रत्येक व्यक्ति का व्यक्तिगत अनुभव है की वास्तविक सुख भौतिक संसाधनों में नहीं है। हम सुख बाहर ढूंढ़ते है जबकि शांति तो हमारे अंदर ही है पर अंदर जाये कैसे। सत्संग ही वह स्थल है जहाँ जिज्ञासु पूर्णगुरु
द्वारा एक दिवसीय सत्संग प्रवचन एवं भजन संकीर्तन
के माध्यम से ब्रह्मज्ञान प्राप्त कर अपने वास्तविक स्वरुप को जान पाते है और वास्तविक शांति को प्राप्त कर पाते है। सुमधूर भजनों का गायन साध्वी महामाया भारती जी द्वारा किया गया और भजनों की व्याख्या संजय जी द्वारा किया गया। डॉ प्रकाश कुमार जी समाज सेवी, गरीबों के मसीहा, स्वास्थ्य जगत के अमूल्य धरोहर थे। जो हमारे समाज को बहुमूल्य रतन खोना पड़ा।
तबले पर नीतीश जी ने साथ दिया। कथा का भरपूर आनन्द क्षेत्र के भक्तों ने उठाया। इस कार्यक्रम में डॉ प्रसन्नता, डॉ विभा सिंहा, डॉ रिड्ड शर्मा, डॉ स्वेता, श्री प्रशांत भूषण सेवानिवृत कमिश्नर आय कर विभाग, सुरेंद्र सिंह बिल्डर, श्री विजय शंकर जी सेवानिवृत डी जी म नाबार्ड,
