कार्यक्रम-2024 के चार दिवसीय राज्य स्तरीय आयोजन का समापन ,सभी जिलों के 233 चयनित बाल वैज्ञानिकों में से 50 बने स्टेट अवार्डी


जहानाबाद :
राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर ने कहा कि बाल वैज्ञानिक समाज व देश की अमूल्य संपदा हैं, उन्हें संरक्षित व संवर्द्धित करने से ही देश का विकास हो सकता है। उन्होने कहा कि आज अपनी रचनात्मक प्रतिभा से अनुसंधान में लगे बच्चे भविष्य के नहीं वर्तमान के वैज्ञानिक हैं। बाल वैज्ञानिकों के शोध के बारे में जानकारी लेने के बाद राज्यपाल ने कहा कि आज वे यहां आकर बहुत कुछ लेकर जा रहे हैं। उन्होने कहा कि वे बाल वैज्ञानिकों के ज्ञानवर्द्धक व रचनात्कक अनुसंधान से भरे प्रोजेक्ट से काफी प्रेरित हुए हैं। महामहिम ने कहा कि उन्होने बच्चों से काफी कुछ सीखकर प्रेरित हुए हैं। उन्होने कुछ उदारहण देकर बताया कि तामिलनाडू के एक बच्चे का प्रोजेक्ट पर जब वैज्ञानिकों ने काम किया तो एक छोटा दिखने वाला बाल वैज्ञानिक का प्रोजेक्ट विज्ञान जगत में नासा के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बना। उन्होने कहा कि कम उम्र के बच्चों की वैज्ञानिक प्रतिभा से भविष्य में देश व समाज को बहुत भला होने वाला है। दरअसल सोमवार को वे साइंस फ़ॉर सोसायटी, बिहार के तत्वावधान में आयोजित राज्यस्तरीय चिल्ड्रेन साइंस रिसर्च प्रोग्राम 2024 के यहां कुरमा संस्कृति स्कूल परिसर में समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का विशिष्ट अंदाज में संचालन प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता व डीएवी के शिक्षक ललित शंकर पाठक ने किया। राज्यपाल श्री आर्लेकर ने कहा कि विज्ञान का जीवन में काफी महत्व है। उन्होने कहा कि विज्ञान की प्रगति के साथ मानवीय सोंच व मूल्यों को भी संरक्षित व संवर्द्धित किए जाने की जरूरत है। उन्होने सवालिया लहजे में कहा कि जहां किसी का विकास किसी के लिए ईष्या व द्वेष की वजह बन रहा है, यह कैसी प्रगति है। राज्यपाल ने कहा कि वैज्ञानिक प्रगति के साथ-साथ हमें मानवीय मूल्यों को आत्मसात करने की अत्यधिक आवश्यकता है।
इसके पहले कार्यक्रम की शुरुआत राज्यपाल व प्रमुख अतिथियों के दीप प्रज्वलन और राष्ट्रगान से हुई।
-विभिन्न जिलों के पचास बाल वैज्ञानिकों को किया सम्मानित :
राज्यपाल द्वारा 50 स्टेट अवार्डी बाल वैज्ञानिकों को पुरस्कृत कर उनके योगदान को सराहा। उन्होने बाल वैज्ञानिकों के विज्ञान मॉडलों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया और बच्चों की रचनात्मकता की प्रशंसा की। राज्यपाल ने राज्यभर के चुने गए श्रेष्ठ बाल वैज्ञानिकों को राजभवन में भी सम्मानित करने की बात करते हुए साेसाइटी फॉर साइंस के अध्यक्ष को बच्चों को वहां लेकर साथ आने का निमंत्रण भी दिया है।
इस अवसर पर स्वागत भाषण में आयोजन समिति के अध्यक्ष व कुरमा संस्कृति एजुकेशनल ग्रूप के चेयरमैन शंकर कुमार ने कहा कि राज्यपाल की उपस्थिति ने बाल वैज्ञानिकों में एक नई उर्जा का संचार किया है वहीं उनके आगमन से कुर्मा गांव एवं पूरा जिला गौरवान्वित हुआ है। राज्यपाल के प्रेरक विचार व आशीर्वाद बाल वैज्ञानिकों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में सहायक साबित होगा। सायंस फ़ॉर सोसायटी, बिहार के अध्यक्ष डॉ अरुण कुमार ने कहा कि विज्ञान तभी सार्थक है जब इसका उपयोग समाज की समस्याओं को हल करने में किया जाए।
इसके पूर्व कुरमा संस्कृति स्कूल परिसर में राज्यपाल के आगमन के साथ ही उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया। उसके बाद उन्होने अतिथियों से परिचय किया। राष्ट्र गान के बाद राज्यपाल ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। विद्यालय की छात्र-छात्राओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। कुर्मा संस्कृति स्कूल के चेयरमैन शंकर कुमार, सायंस फ़ॉर सोयायटी के अध्यक्ष डॉ अरुण कुमार, सत्यम शिवम सुंदरम के प्रबंध निदेशक ओम नारायण, ग्रुप की ट्रस्टी नीलू देवी, निदेशक राहुल कुमार, प्राचार्या अपर्णा सिंह भी राज्यपाल के साथ दीप प्रज्वलन में शामिल हुए। अध्यक्ष शंकर कुमार एवं अन्य मंचासीन अतिथियों द्वारा राज्यपाल को शॉल, मोमेटों से सम्मानित किया गया। सत्यम शिवम सुंदरम ग्रूप के एमडी ओम नारायण ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए सभी उपस्थित अतिथियों और आयोजन में सहयोग देने वाले सभी लोगों का आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में साइंस फॉर सोसाइटी के पदाधिकारियों और जिला प्रशासन का विशेष सहयोग रहा।