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डॉक्टर एकता की कलम से——

*ना मैं तेरी वह ख्वाब रही ना तमन्ना रही तुझे मेरी चाहत की।*
*ना कद्र है मेरी चाहत की, तो सब कुछ तूने पा लिया बेखबर किसी आहट की।*
*कभी नशा चढ़ा था मेरी चाहत की, मेरी रोम रोम में तेरी आहट थी।*
*मैं कुआं बन रह गई वह प्यास बुझा कर चला गया।*
*यहां प्यार के नाम पर धोखा है। पता नहीं किस-किस ने किसको लूटा है।*
*प्यार का कोई मोल नहीं, सारे मतलब के खेल हैं।*
*प्यार बस शब्दों के मेल है, जिसका शब्द ही अधूरा हो, वह प्यार कैसे पूरा हो।*
*इन शब्दकोश के शब्दों से,तू कब तक मुझसे खेलेगा।*
*तुम शब्द का बाण चलाते हो, यूं शब्दों में उलझते हो।*
*यूं मेरे सीने पर शब्दों के बाण चलाते हो ।*
*मेरे प्यार को चाहे जितना भी झूठलालो, मुझ में ही सारी कमियां दिखा दो।*
*खुद का मान बड़ा लो, मैं चुपचाप सह जाऊंगी।*
*मैं खुद ही दूर चली जाऊंगी, मेरे धैर्य को ना ललकरो।*
*मैं जो चाहूं दो शब्दों में खेल जाऊंगी,*
*राज घराने की राजवंशी हूं, रखती मन में खुद्दारी हूं।*
*जब तेरे मन में मेरी मूरत नहीं, फिर उस नयन को तेरी जरूरत नहीं ।*
*रोशन कर तू तेरी दुनिया, मेरी किस्मत ही काली है, क्या दोस में दूं तुझको*
*मेरी वीरान  कहानी है।*
*क्या करूं बसे हो इस दिल में हो,*
*बिना किसी आहट तेरी नजरों से दूर चली जाऊंगी*
*मर मिट जाऊंगी पर वापस तुझे नजर ना आऊंगी।*
*थक गया है, दिल मेरा यह दुनिया मुझको और कितना ठुकराएगा ।*
*आखिर मैं कब तक नीर बहाउंगी—-*

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