सामाजिक और लोक संस्कृति का पावन पर्व है छठ महापर्व:वीणा गिरी


गया। जनसंख्या नियंत्रण फाउंडेशन महिला विंग की जिला अध्यक्ष वीणा गिरी ने छठ की महिमा पर बताया कि लोक आस्था का महापर्व छठ बिहार का लोकप्रिय तथा प्रसिद्ध पर्व है। इसमें आस्था और विश्वास का अनूठा समायोजन दिखाई पड़ता है। महापर्व छठ पर्व भक्त और भगवान के बीच स्थापित प्रत्यक्ष संबंधों को दर्शाता है।छठ पूजा में किसी बिचौलिए की आवश्यकता नहीं पड़ती है। यह एक ऐसी पूजा है, जिसमें भक्त का भगवान से प्रत्यक्ष संपर्क होता है। किसी पंडित या पुजारी की आवश्यकता नहीं होती है। छठ पूजा की परंपरा और उसके महत्व का प्रतिपादन करने वाली अनेक पौराणिक और लोक कथाएं प्रचलित है।पूजा का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष इसकी सादगी, पवित्रता और लोक संस्कृति है।भक्ति और आध्यात्मिक से परिपूर्ण इस पर्व के लिए विशाल पंडालों और भव्य मंदिरों की न जरूरत होती है न ही ऐश्वर्ययुक्त मूर्तियों की। छठ पर बांस निर्मित सूप, टोकरी, मिट्टी के बर्तनों, गन्ने के रस, गुड़, चावल और गेहूं से निर्मित प्रसाद और मधुर लोकगीतों से युक्त होकर लोक जीवन की भरपूर मिठास का प्रसार-प्रचार कराता है।सच कहा जाए तो प्रकृति ही ईश्वर है,जिसकी कृपा से हमारा जन्म होता है। जिसके द्वारा हमारा पालन- पोषण होता है। प्रकृति की नजर में सभी मनुष्य समान होते हैं।प्रकृति का स्नेह यदि सभी को समान रूप से सुलभ होता है। तो उसका कोप भी सभी जीवों को समान रूप से ही उठाना पड़ता है। लोक परंपरा के मुताबिक सूर्य देव और छठी मैया का संबंध भाई- बहन का है इसलिए छठ के मौके पर सूर्य की आराधना विशेष फलदाई मानी गई है। परंपरा के अनुसार छठ पर्व के व्रत को स्त्री और पुरुष दोनों समान रूप से रख सकते हैं। छठ पूजा की परंपरा और उसके महत्व का प्रतिपादन करने वाली पौराणिक और लोक कथाएं के अनुसार यह पर्व सर्वाधिक शुद्धता और पवित्रता का पर्व है।