देशबिहारराज्यलोकल न्यूज़

मॉ प्रभावती देवी साहित्य स्मृति णागणूर कलम् सम्मान समारोह का सफल आयोजन संपन्न।

जहानाबाद
        काको रोड स्थित सागर भवन में मॉ प्रभावती देवी साहित्य स्मृति णागणूर कलम् सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। सर्वप्रथम मां प्रभावती देवी के प्रतिमा पर पुष्पांजली किया गया और द्विप प्रज्वलित कर सम्मान समारोह कि शुरुआत हुई। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री रविन्द्र कुमार सिंह ने किया वहीं सम्मान सत्र समारोह का आयोजन शिक्षाविद सह सामाजिक कार्यकर्ता अशोक कुमार प्रियदर्शी ने किया। इस वर्ष का मॉ प्रभावती देवी साहित्य सम्मान बिहार की जानी-मानी कवियत्री अल्पना आनंद को दिया गया वहीं युवा कलमकार पंकज कुमार को विशेष सम्मान दिया गया। कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार सह समाजसेवी संतोष श्रीवास्तव, सम्मानित अतिथि डॉ सुनैना कुमारी, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी-अरवल, अतिथि प्रो रामभवन शर्मा, सुधाकर राजेन्द्र, प्रह्लाद भरद्वाज ने  मंच से सागर आनंद को आशीर्वाद देते हुए कहा आपको णागणूर जैसे बड़ी रचना के लिए बहुत बधाई हो आप यूं ही निरंतर बढ़ते रहे वहीं मंचासीन अतिथियों ने णागणूर की प्रति का लोकार्पण किया। राष्ट्रीय कवि संगम के प्रांतीय महामंत्री अविनाश पाण्डेय एवं शब्दाक्षर के प्रदेश अध्यक्ष प्रो मनोज मिश्र मंच से णागणूर का विस्तार से संस्मरण किया और कहा यह एक अद्भुत रचना है जो समस्त ब्रह्माण्ड में निहित पात्र व घटनाओं को बहुत बारीकी से दर्शाया है। इस मंच से लोगों को विशेष आतिथ्य सत्कार कर रही मंजू आनंद और विभावरी विभा सागर ने उपस्थित लोगों के सम्मान में अपनी उद्गार व्यक्त किया।
             सम्मान सत्र के उपरांत काव्य गोष्ठी का रंगारंग आगाज हुआ। इस सत्र का संचालन राष्ट्रीय कवि संगम जिला ईकाई जहानाबाद के अध्यक्ष राणा बिरेंद्र सिंह एवं चितरंजन चैनपुरा ने किया। इस काव्य सम्मेलन में विभिन्न जिलों से आए प्रतिभागियों ने अपनी रचनाओं को प्रस्तुत किया। काव्य पाठ करने वालों में मानसी सिंह, सावित्री सुमन, मुमताज प्रिया, ललीत शंकर पाठक, कुमार आर्यन, नवनीत कृष्णा, इंदल कुमार शैलेन्द्र सिंह शैल, अनिल फतेहपुरी, अमृतेश मिश्र, नंदन मिश्रा, महेश मधुकर, शामिल हुए। कार्यक्रम के अंत में णागणूर कलमकार गज़लकार सागर आनंद ने उपस्थित सभी साहित्यकारों एवं विद्वजनों को धन्यवाद देते हुए कहा कि आप लोगों का इसी तरह आशिर्वाद बनी रहे जबतक हमारी सांसें है तब तक हमारी लेखनी समर्पित है। कार्यक्रम के अंत में डॉ पी के चक्रवर्ती ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर सैंकड़ों श्रोता सुधी जन उपस्थित रहे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!