देशबिहारराज्यलोकल न्यूज़
गुरू वंदना


🌹गुरू वंदना🌹
—————————
गुरू गोविन्द दोनों खड़े
का को लागों पांव,
बलिहारी गुरू आपनों
गोविन्द दियो बताय।
गुरू की महिमा अपरंपार है
गुरू से बड़ा न कोय
गुरू तो ब्रह्मा, बिष्णु, महेश है
और गुरू माता- पिता समान है।
गुरू हीं हमें अंधकार से प्रकाश
और सारे दुर्गुणों का करते विनाश।
पंच प्रकृतिक तत्व से हीं बना
सकल सृष्टि जगत अविनाश।
गुरू बिना यह जग सूना है
गुरू लखावे सो लखो भाय,
गुरू वंदन,चंदन और अभिनंदन
गुरू के पांव सदा पखारिये
तभी तो कहे “मिराक” कविराय।
-जगदीश प्रसाद राय”मिराक”
(कवि,शायर,उपन्यासकार)
बांसबाड़ी, बायसी,पूर्णिया (बिहार )
पिन- 854315
मोबाइल-9798433616