भारतीय संविधान का संस्कृत भाषा में रूपांतरण, एक ऐतिहासिक कदम: डॉ. एस. के. सुनील


जहानाबाद:- पूरे देश वासियों के लिए 26 नवंबर का दिन पहले से ही संविधान दिवस के रूप में ऐतिहासिक रहा है लेकिन आज के दिन भारतीय संविधान का संस्कृत भाषा में रूपांतरण का विमोचन जो माननीय राष्ट्रपति जी के कर कमलों के द्वारा हुआ यह प्रखर राष्ट्रवाद का द्योतक और देशवासियों के लिए गौरवशाली क्षण है। आज के दिवस को इतिहास के स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जायेगा। उक्त बातें बताते हुए मगध प्रमंडल के संस्कृत शिक्षक संघ के अध्यक्ष एवं राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षाविद डॉ एस के सुनील ने कहा कि आज का दिन संस्कृत जगत से जुड़े लोगों के लिए तो खुशी का पल है ही संपूर्ण देशवासियों के लिए भी आज का दिन ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा कि इससे भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक गौरव जिसकी पहचान संस्कृत से रही है उसके खोए गौरव को फिर से पुनर्स्थापित करने में भी मदद मिलेगी। शिक्षाविद डॉक्टर सुनील ने इस पुनीत कार्य के लिए महामहिम राष्ट्रपति श्रीमति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमन्त्री श्री नरेंद मोदी, गृह मंत्री अमित शाह सहित उन सभी लोगों के प्रति कृतज्ञता जाहिर किया है जिन्होंने भारतीय संविधान को संस्कृत भाषा में रूपांतरण और उसके विमोचन कार्यक्रम में अपनी ओर से भागीदारी निभाई है। उन्होंने इस कदम को संस्कृत भाषा के लिए उद्भव काल बताते हुए, संस्कृत भाषा के विकास और संवर्धन से जुड़े शिक्षकों, प्राध्यापकों एवं शिक्षार्थियों की ओर से प्रधानमंत्री जी एवं महामहिम राष्ट्रपति जी के प्रति आभार प्रकट किया है।