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कर्मक्षेत्रीय सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि:-

सम्मानितवृंद,सादर अभिवादन!🙏
*-जैसा कि आपको ज्ञात है, कि मेरी कर्म संस्था भारतीय रेल है, और भारतीय रेल के सर्वोच्च मंच रेलवे बोर्ड की लाल कालीन पर खड़े होकर अपने सर्वोच्च पदाधिकारियों से सम्मानित-पुरस्कृत होना, मेरे साथ भारत भर के मेरे सभी अखिल भारतीय कार्यालयी मित्रों का सम्मान है।*
*~दिनांक:18-अक्टूबर-2024 की संध्या मेरे अभी तक के कर्म क्षेत्रीय जीवन की अविस्मरणीय शाम बन गई, जब रेलभवन में रेल मंत्रालय के सम्मानित मंच पर, मेरे द्वारा रचित गजल संग्रह “सन्नाटे भी बोल उठेंगे” को मैथिली शरण गुप्त अखिल भारतीय द्वितीय पुरस्कार प्रदान किया गया। यह पुरस्कार मैं अपनी भारतीय रेल के कर्मठ, कार्यालयी सेवा समर्पण पश्चात, लिखने पढ़ने वाले साहित्य सेवी सहकर्मियों व अधिकारियों को समर्पित करता हूँ।*
*-मैं आभार ज्ञापित करता हूँ, अपने विभागीय साहित्य प्रेरक अधिकारी द्वय, वरिष्ठ मंडल यांत्रिक इंजीनियर (समन्वयन) सियालदह,पूर्व रेलवे-श्रीमान रोहित रंजन साहब एवं मंडल यांत्रिक इंजीनियर, सियालदह, पूर्व रेलवे-सुश्री दिव्या वर्मा मैडम का, जिनके आवश्यक औपचारिक हस्ताक्षरों की प्रक्रिया स्वरूप मैं इस मंच तक पहुंच सका। साथ ही मैं अपनी भारतीय रेलवे के राजभाषा विभाग को भी धन्यवाद व्यापित करना चाहता हूँ, जो मेरी हिंदी सेवा को उचित प्रोत्साहन एवं मान देते हैं।*
*-आप सभी को प्रणाम सहित आपका~*
रवि प्रताप सिंह
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